युद्ध में पाले हमेशा दो ही होते है
धर्म या अधर्म
या
सत्य या असत्य
या अधर्म के पाले में हम थे
या
वो थे
ऐसा नहीं की जीत हमेशा सत्य की होती है
क्षणिक जीत तो असत्य की भी होती है
इतना है बस निवेदन
जननी और जन्मभूमि से बढ़ कर कोई नहीं होता है
सारे गुण अवगुण इसके आगे बेकार है